आवाज उठाना चाहिए

कल की सुबह सुनहरी को
संतोष भरि एक पहरी को
दोषी चाहे बलि ही हो
अपना हो या संगि ही हो
आवाज उठाना चाहिय
दोषि के दोषो पर पूर्ण विराम लगाना चाहिए
आवाज………
कल आंदोलन न मजबूरी हो
फिर कोई संग्राम जरूरी हो
पनपा हैं गुनाह कुचलो इसको
कल जड़े न इसकी गहरी हो
सच्चाई की जीत को झूठ डरना चाहिए
आवाज………
किसी न किसी को ये अंधकार मिटानी तो होगी
मशाल जला दे चिन्गारी वो जलानी तो होगी
तो तू क्यो नहि कल तेरी प्रेरक कहानी तो होगी
मिटनी हैं जवानी एक दिन पानी पानी ही होगी
हम थे इसकी खातिर कोई पहचान बननी चाहिए
आवाज……..
तू अकेला हैं अकेला हि सही
हार जायेगा कोइ बात नहि
भगत सिहं के बलिदानो से फिर
जन जन सोई अब जाग्रित हो
मानवता की जीत को सर्वस्व लुटाना चाहिए
आवाज………

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