मैं डरता हूं (लेखक- चंद्रकांत सारस्वत)

जिसको कभी पाया नहीं ना जानें क्यों
उसको खो देने से डरता हूं
उसके बारें में कुछ कहने से भी डरता हूं
सुनने से भी डरता हूं

मैं उसको पाने से भी डरता हूं
खो देने से भी डरता हूं
मैं उसको किसी और
‘गैर‘ का हो देने से भी डरता हूं

मैं डरता हूं मैं मौत से नहीं
जिंदगी तुझसे डरता हूं
तुझको चाहने से डरता हूं
जिदंगी तुझको पाने से डरता हूं
जिंदगी तू अपनी है ही नहीं
मैं तेरी भोली-भाली शक्ल से डरता हूं

(लेखक- चंद्रकांत सारस्वत)

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