प्यार क्या होता है… ?

धीमे से हौले से चलने वाली हवा को
जो तुम अपने गालों पे महसूस करते

तो तुम भी जान जाते ये प्यार क्या होता है।

जो बारिश में कभी तुम खिड़की पे आकर
चेहरे पे बूंदो को बरसने तो देते
जो तुम कभी तो अपनी ज़िद छोड़ कर
कुछ दूर तक हमारे साथ तो चल देते

तो तुम भी जान जाते ये प्यार क्या होता है।

जो कभी नदी किनारे बैठकर उसमे
पत्थर तो फेंका करते तुम
और अनजाने ही होने वाली बातों पर
कभी बेवज़ह हँसा करते तुम

तो तुम भी जान जाते ये प्यार क्या होता है।

जो कभी दिल की रेत पे तुम
महलों को तो बनने देते
हर इक नयी सुबह से पहले
इक शाम को तो ढलने देते

तो तुम जान जाते ये प्यार क्या होता है।

जैसे बच्चे का गुल्लक में सिक्के जमा करना
उन सिक्कों की कभी खनक तो सुना करते
बात बात पे हमसे तुम शिकायत तो किया करते
जाते हुए तुमने कभी पलट कर जो देखा होता

तो तुम जान जाते ये प्यार क्या होता है।

— हिमांशु ‘मोहन’

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