लोग इज्जतदार है हम

सर उठा तो सरदार है हम !
लोग इज्जत दार है हम !!

कोइ हमको रोक दे ,
या राह चलते झोक दे !
सहन ये होता नही ,
कोई काम करते टोक दे !!
कोई भी गर काम करते ,
बस उसे ईमान कहते !
क्या सही और गलत क्या ,
हमी ये पहचान करते !!
यहा की सरकार है हम !
लोग इज्जतदार है हम !!

घर मे है सब नाम वाले ,
है अनोखे काम वाले !
कुछ भी होजाये कही भी ,
है सभी अन्जाम वाले !!
कुछ बडे और कुछ है छोटे ,
कुछ सही और कुछ है खोटे !
कुछ की है जो वीरगाथा ,
सुन के चकरा जाता है माथा !!
कानून पे थानेदार है हम !
लोग इज्जतदार है हम !!

सब्से सयाने है पिताजी ,
जवानो से लगाते है वाजी !
बस अभी आए थे पीकर ,
फिर भी है पीने को राजी !!
सुबह जब भी नीद खुलती ,
बार मे होती मुखारी !
रात मे भी बार जाते ,
कर के आते है बियारी !!
शेर की दहाड है हम !
लोग इज्जतदार है हम !!

सात भाई मे बहन है ,
उसका गुस्से का बदन है !
चारो पहर पे मस्त रहता ,
ऐसा ये अपना सदन है !!
बडी चाह दौलत की उनको ,
सब मे दौलत भारी है !
चाची की चोअन्नी का हिसाब ,
आज तलक उधारी है !!
धन दौलत का सन्सार है हम !
लोग इज्जतदार है हम !!

वो डोले से उतर कर आई थी ,
और घर मे महतम छाई थी !
गाज गिरी सुनकर भाभी पर ,
वो सौतन की सहनाई थी !!
आख अनुज की भिगा गई ,
वो भाई की नादानी है !
बीबी छोड रखा जिसको ,
वो शहरी मर्दानी है !!
जुल्म पे हथियार है हम !
लोग इज्जतदार है हम !!

आरजू बस आन की है ,
मेरे घर के सान की है !
न चाह दौलत की मुझे ,
पर सोहरत मुझे जान सी है !!
भवर तो करना पडेगा ,
उनके दिल के अन्दर मे !
लहरे खुशियो कि आएगी ,
तब , मेरे घर समन्दर मे !!
कस्ती सच्चाईयो की
यू खेवना सिखादून्गा !
आसमान से उतार उन्हे
जमी पर रेन्गना सिखादून्गा !!
वक्त पे हथियार है हम !
लोग इज्जतदार है हम !!
( अनुज तिवारी )

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