तूफ़ान

ताहिर ने ताहिरी बना दी।
शायर ने शायरी बना दी।
आशिक़ ने आशिकी बना दी।
बेवफा ने बेवफाई बना दी।

कमबख्त हम ही नाकारा थे
उस जालिम की नज़रों में।
वरना हमारे दिल में भी
तूफ़ान चल रहा था।


निशान्त पन्त “निशु”

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