मै तेरे पास ही रहता हूँ|

रोज सुबह उठके जब मै अपने सपनो से जगता हूँ ,
तेरी बातो को गीत बनाके गुनगुनाता रहता हूँ,
ऑफिस में मै तेरी याद में काम सारे निपटाता हूँ,
कभी यहाँ वहाँ, कभी इधर उधर
सब काम को करके तितर बितर
हर जगह तुझे ढूंढता रहता हूँ,
मै तेरे पास ही रहता हूँ|

लौटता हूँ उधर से जब आते ही फोन उठता हूँ,
तेरे मैसज को देख के मै मन ही मन मुस्काता हूँ,
फिर फोन की घंटी बजती है मै हर्षित हो जाता हूँ,
कभी घबराकर कभी इतराकर हवा के संग मै बहता हूँ,
मै तेरे पास ही रहता हूँ|

वो समय सुहानी होती है जब शाम रात में बदलती है
मै तुझमे खोया रहता हूँ तू मुझमे खोयी रहती है
रुकता नही सिलसिला बातो का प्यार की बरसातों का
कभी अंदर बाहर आगे पीछे कभी बिस्तर के उपर निचे
तेरे बातो में खोकर फिर मै बार बार ये कहता हूँ,
मै तेरे पास ही रहता हूँ|

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