मै चोर हूँ |

मैं चोर हूँ
मै बचपन की हर शरारत चुराना चाहता हूँ
मैं हर कहानी हर कहावत चुराना चाहता हूँ
मै बचपन की मार और दुलार चुराना चाहता हूँ
मै सबका प्यार और पुचकार चुराना चाहता हूँ |
मै चोर हूँ |

मै चोर हूँ
मै हर मौसम हर बहार चुराना चाहता हूँ
मै हर पर्व हर त्यौहार चुराना चाहता हूँ
मै दिवाली की प्रकाश और रक्षाबंधन का उमंग चुराना चाहता हूँ
मै दशहरे की जीत और होली का रंग चुराना चाहता हूँ
मै चोर हूँ |

मै चोर हूँ
मै सूरज की रौशनी और नदियों की धार चुराना चाहता हूँ
मै चाँद की शीतलता और हवा की रफ़्तार चुराना चाहता हूँ
मै मिटटी की महक और सावन की बरसात चुराना चाहता हूँ
मै पर्वत की ऊचाईं और रेत की प्यास चुराना चाहता हूँ
मै चोर हूँ |

मै चोर हूँ
मै वृक्षो की हरियाली और पक्षियों की चहक चुराना चाहता हूँ
मै पत्तो पे ओस की बुँदे और फूलो की महक चुराना चाहता हूँ
मै गिद्ध की नजरे और मोर का ताज चुराना चाहता हूँ
मै भवरें की गुंजन और कोयल की आवाज चुराना चाहता हूँ
मै चोर हूँ |

मै चोर हूँ
मै हर उत्सव हर महफ़िल चुराना चाहता हूँ
हर आशिको के धड़कते दिल चुराना चाहता हूँ
मोहब्बत का एह्शाश और होठों की मुस्कराहट चुराना चाहता हु
मै प्यार की हर आहट चुराना चहजता हूँ
मै चोर हूँ |

” बीते हुए वक़्त की खुशियां गम बचपना शरारते आँखों के सामने आके सताते रहते है
हे ईश्वर कुछ ऐसा करिश्मा कर दे की ये सबकुछ मै चुरा लू और फिर से मै
उस जिंदगी को अपने आधीन कर लूँ |”

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