तू माँ है |

हर सुबह गुँजती है स्वर मेरे मन में ,
महसूस करता हूँ मै तुझे पूरे वातावरण में ,
तू सूर्य की किरण है या हवा का गमन है |
तू कौन है, तू क्या है|

सूछ्म है तो बिंदु की तरह,
विशाल है तू सिंधु की तरह ,
तू नीर है या समीर है,
तू खुली है या जंजीर है |
तू कौन है, तू क्या है|

पाताल की तरह तू नीची है,
पर्वत की तरह तू ऊँची है,
तू कोमल है तू कठोर है,
तू हर जगह हर ओर है |
तू कौन है, तू क्या है|

ढूंढ रहा हूँ मै तुझे हर जगह ,
तू ईश्वर है या परमेश्वर है|

आज असमंजस में है मन मेरा
पूछ बैठा ह्रदय से
तू कौन है, तू क्या है,

आवाज आई …………..

तू माँ है |

“सारे सवाल सुलझ गए और सरे जवाब पलकों के अंदर छप गए ”

जवाब कुछ इस कदर थे ……………………..

तेरे आश्रय में माँ मै जीता हूँ,
तेरे आवाज से माँ मै सीखता हूँ,
तेरे ही हांथो को थाम के चलता हूँ,
तुही सहारा है माँ तुही जहाँ है |
तू माँ है |

तू शरीर है माँ तू परछाई है,
तू रक्त है माँ रग रग में समाई है ,
मेरी हर साँस तेरे से ही आई है ,
तेरे जैसा माँ कोई कहाँ है |
तू माँ है |

तू पास है माँ एह्साश है ,
तू आश है माँ विश्वाश है ,
तू खश है माँ प्रकाश है ,
तुही जमी है माँ तुही आसमाँ है |
तू माँ है |

तू कल है माँ तू आज है ,
तू संगीत है माँ तू साज है ,
तू मन है माँ तुही आवाज है,
तेरी चरणो में माँ मेरा जहाँ है |
तू माँ है |

तू माँ है |

तू माँ है |

Leave a Reply