जीन्स की जवानी (व्यन्ग काव्य )

ट्राउजर का करिस्मा , है जीन्स की जवानी ,
सर पे है टोपी , जो दिखती जापानी ,
काला चश्मा लगा , गोरे से चहरे मे ,
और लगी लाल टाई गले मे ,
टी-शर्ट पे हो शर्टिन्ग ,
जीन्स की क्या खूब फिटिन्ग ,
छोटे से पैरो मे पहने है बूट ,
चलते अकड के , पहन के सूट-बूट ,
और क्या करू मै उनकी बखानी !
ट्राउजर का करिश्मा , है जीन्स की जवानी !!

वक्त कि परवाह नही खडे है मार्केट मे ,
लम्बी रुमाल लटकी है छोटे से पाकेट मे ,
घर मे खाने को नही , होटल मे बैठे है ,
चाय सिगरेट और फिर सिगरेट को ऐठे है ,
और उडाते धुआ ट्रेन की रफ्तार से ,
जहर कोबरे का निकलता उनके फूकार से ,
चाल क्या कहू , है उनकी मस्तानी !
ट्राउजर का करिश्मा , है जीन्स की जवानी !!

सप्ताह क आखरी , और आये इत्तवार ,
पैक पे पैक बनाते है यार ,
खुलती बोतल एमडी और रम की ,
फिर मजा लेते है जाम की ,
झूमते नशे मे , पर बाते है दम की ,
ये अदा उनकी न किसी काम की ,
पास मे पल्सर , हो लडकी साथ मे ,
दिन भर की थकान , लगे कडकी हाथ मे
इन्ही अदाओ कि दुनिया दिवानी !
ट्राउजर का करिश्मा , है जीन्स की जवानी !!

( अनुज तिवारी )

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