सन्घर्ष

सन्घर्ष करो-२ ,सन्घर्ष करो-२ !!

सन्घर्ष हो जीने का मक्शद ,
सन्घर्ष बिना क्या जीना है !
पर जो सन्घर्ष न कर सके ,
जीने से बढिया मरना है !!

सन्घर्ष शब्द मे हर्ष छिपा ,
जो खुशहाली लाता है !
सन्घर्ष न करने वालो का ,
मस्तक नीचे हो जाता है !!

हक लेना अपना अगर ,
सर उठा हसते हुये !
आकर के इस राह पर ,
जीवन मे उत्कर्ष भरो!!

सन्घर्ष करो-२,सन्घर्ष करो-२ !! !!

(कवि–अनुज तिवारी )

Leave a Reply