कभी तो याद तेरी

कभी तो याद तेरी पलकों को भिगोएगी
न सही महफिल में, तन्हाई में रोएगी
रूठकर कतराने लगी मुझसे मेरी परछाइयां
सीने में कांटों सी तरह चुभने लगी तन्हाइयां
गम ने ली हैं हँस हँस कर अंगड़ाइयां
तू भी अपना चैन सकून मेरी कद्र ही खोएगी
कभी तो याद तेरी पलकों को भिगोएगी

तेरी जिन्दगी में शामिल होने की दुआ मांगी थी
कुछ नहीं सिर्फ दर्दे दिल की दवा मांगी थी
तू इतनी काफिर थी कि जज्बातों को न समझी
बेवफा तुझसे मुहब्बत के सिवा क्या मांगा थी
तू भी मेरी यादों को तड़प तड़प के संजोएगी
कभी तो याद तेरी पलकों को भिगोएगी

कभी आईने के सामने खुद का दीदार करना
तेरे चेहरे पे हैवानों की दास्तां ए इबारत होगी
लूटी है तूने किसी वफा दिल की आबाद जिन्दगी
तू भी जिन्दगी भर गम की लडि़यां पिरोएगी
कभी तो याद तेरी पलकों को भिगोएगी

वो चाँदी सी बातें रही सालों तलक
वो सोने हीरे से कीमती वादे भी किए थे तूने
कहां गई वो कोहेनूर सी कसमें जो तूने बेखोफ खाई थी
वो तेरी हरकतें तुझको जहन्नुम में डुबोएगी
कभी तो याद तेरी पलकों को भिगोएगी

जो शख्स कर गए तौहीन मुहब्बत की
उनको फिर मुहब्बत मिली ही कहां है
तू खुश रहेगी हरदम दुनिया की नजर में लेकिन
नादां तू भी किसी के गम में रो रोकर सोएगी
कभी तो याद तेरी पलकों को भिगोएगी

अब तो दामन आंसुओं की महफिल हो गई है
जिसको समझा जान वह अब बेवफा हो गई है
अब ये मेरी जिस्मो जवानी फकत गम ही ढोएगी
कभी तो याद तेरी पलकों को भिगोएगी

2 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari 05/06/2015
    • sanjay kumar maurya sanjay kumar maurya 21/06/2015

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