अनुभव

क्षण क्षण अनुभव करता रहता हृदय
मनहर सी छाप छोड़ती बातें
जो अन्तःकरण को प्रेम में विकल कर जाते
स्नेह प्रीत की एक छोटी सी
सुन्दर मनभावन सी बगिया निर्माण की
जहां नितान्त शान्ति व सन्तोष हो
तथा उसे खुशियों के मनसूबों से सींचकर
मनमोहक पुष्पों को उगाने की
जो खिलकर सुगन्ध व चमक फैलाए
स्वयं तथा औरों के संसार में
एक मीठा सा जीवन्त रस समाहित करें
उनकी मृदु सी बातेंं जैसे
अन्तर की बूंदें रस बन गई हों
कोई पहर ऐसा न होता कि जब वे
स्मरण न होते हों और सताते न हों
हमारे बीच हुए संकल्पों की श्रृंखलाओं का
मन मस्तिष्क पर उतार चढ़ाव
प्रत्येक समय होता रहता
बाहों में जीवित रहने और मृत्यु होने के लिए
एक साथ लिए गए प्रण सर्वदा याद आते
जब भी वह दूर हुआ करते तो मन
उसकी कोयल सी मधुर वचनों को
सुनने की खातिर विह्वल हो उठता
व जब भी वे समीप आ जाया करते हो
मन अति शान्ति व अति सुख का
अविस्मरणीय अनुभव करता ।

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