एक लम्हा तेरे सन्ग ……[गजल]

!! एक लम्हा तेरे सन्ग …!!

तेरे सीने से लिपट कर सोने पे सुकून मिलता है !
एक मैदान-ए-जन्ग मे फतेह होने से सुकून मिलता है !

सुकून नही मिलता लाखो कि दौलत पाने से भि,
एक लम्हा तेरे सन्ग खोने पे सुकून मिलता है !!
एक लम्हा तेरे संग…!!

ख्वाहिसे न रही अब ख्वाबो के खजाने मे ,
तेरी यादो के हर पल सन्जोने मे सुकून मिलता है !
एक लम्हा तेरे सन्ग ….!!

तेरे हुस्न पे हुजूर-ए-हुक्म भी कुर्बान कर दू ,
गर न कर पाया तो रोने पे सुकून मिलता है !
एक लम्हा तेरे सन्ग ….!!

बन्दिशे नही , वल्कि जिन्दगी है ! तेरी बन्दगी करना ,
बन्दगी कि बारिश मे खुद को भिगोने पर सुकून मिलता है !
एक लम्हा तेरे सन्ग ….!!

तेरी यादो ने अश्को का सैलाब भर दिया ,
अब सैलाब मे खुद को डुबोने पर सुकून मिलता है !
एक लम्हा तेरे सन्ग ….!!

(शायर -अनुज तिवारी )

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