यही तो जीवन है (लेखक- चंद्रकांत सारस्वत )

यही तो जीवन है,
इसको समझना पड़ता है
कहीं सब कुछ मिल जाता है,
कहीं अभाव में कोई मर जाता है,
पल में पत्थरों में भी उभर आता है,
कहीं हरियाली में भी बंजर नजर आता है,
यही तो जीवन है,

ये जीवन का चक्र है,
जो बस चलता जाता है,
तुम भी खोजो तो नजर आ जायेगा,
इसी में स्वर्ग-नर्क तुमको दिख फिर जायेगा,
ये जीवन है, जो बस चलता जाएगा,
पल में राजा-पल में रंक बनाता जाता है,
अपने पीछे पूरा इतिहास छोड़ ये जाता है,
यही तो जीवन है,

मिला है क्या कभी किसी को जैसा उसने चाहा है
होता वैसा ही है जैसा इस जीवन में लिखा है
कहीं लड़नी पडती है लडाई अपने ही भाई से
तो कंही सीता को भी अग्नि से सिद्ध खुद को करना होता है
अकबर को भी अंत में, दफन जमीं में होना पड़ता है
ये जीवन है, इसको समझना पड़ता है
यही तो जीवन है,

#लेखक- चंद्रकांत सारस्वत

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