ज़िंदगी, एक चलचित्र

ज़िंदगी, एक चलचित्र
जहाँ हर कोई अदाकार
निभा रहा है अपना किरदार
कभी मिलती तालिया
तो कभी बस तिरस्कार
रोते हुए से हँसना,
पल भर में रोना,
अपनी पटकथा का हर रोज आंकलन करना,
कई बार ऐसा लगता जैसे, हम ही हो, लेखकार
परन्तु पल में भ्रम का ज्ञान हो जाता,
हमें हर रोज एक नया किरदार मिल जाता,
रोज पर्दा गिरता, रोज उसका उठना,
जीवन का यही एक सार,
हर कोई निभा रहा है यहाँ भूमिका,
रिश्तों के पीछे भी छुपाई गयी एक वजह,
शब्द शब्द से बना संवाद,
ज़िंदगी, एक चलचित्र
जहाँ हर कोई अदाकार
निभा रहा है अपना किरदार

2 Comments

  1. bimladhillon 29/05/2015
    • chandrakant saraswat chandrakant saraswat 29/05/2015

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