शिकवा बेटी का ……

    1. क्यों कहती माँ तुम “बेटा” मुझको
      क्यों मेरी पहचान मिटाती हो !
      मेरा भी अपना असितत्व है,
      दुनिया में उसे क्यों छिपाती हो !!

      क्यों कहती………………………!!

      जन्म हुआ होगा मेरा भी किंचित,
      यथासम्भव तुमने की पुत्र प्राप्ति हो !
      कष्ट सहे होंगे मेरे लिए भी उतने ही ,
      फिर क्यों उनका मान घटाती हो !!

      क्यों कहती……………………..!!

      अगर तुम ही छीनोगी मुझसे मेरा हक़,
      फिर जगत में कैसे मुझे प्राप्त ख्याति हो !
      इस पुरुष प्रधान समाज में बेटी को
      कैसे उसके सम्मान कि हिफ़ाज़त हो !!

      मत कहना……………………….!!

      गदगद होती हूँ “माँ” तेरा प्यार पाकर,
      जितना तुम मुझ पर दुलार लुटाती हो !
      गर नहीं भेद बेटा बेटी का तेरे अंतर्मन में,
      फिर क्यों तुम बेटा कहकर मुहे सताती हो !!

      क्यों कहती……………………….!!

      कर भरोसा मुझ पर हे मरी जननी माँ,
      पुकार लेना मुझको इर्द गिर्द पाओगी !
      मत कर अफ़सोस एक दिन दिखलादूंगी,
      बेटे सी बढ़कर दुनिया में रोशन तेरी बेटी हो !!

      क्यों कहती माँ तुम “बेटा” मुझको
      क्यों मेरी पहचान मिटाती हो !
      मेरा भी अपना असितत्व है,
      दुनिया में उसे क्यों छिपाती हो !!

      ( डी. के. निवातियाँ )

2 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari 25/05/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/05/2015