गुडिया —पार्ट ३

सूरज किरन , चमके गगन ,
चले सनन-सनन, बहकी पवन ,
उडती पतन्ग !
गुडिया है दन्ग!!

खीचे है डोर , मस्ती और शोर,
मन को हिलोर , हसे जोर-जोर,
अम्मा के सन्ग !
गुडिया है दन्ग !!

ले के आश , गई अम्मा के पास ,
इन्द्रधनुश , दमके आकाश ,
इन्द्रधनुश क प्यारा रन्ग !
गुडिया है दन्ग !!

कोयल कूके , बाग बगीचे ,
अति प्रिय वाणी , नभ तल नीचे ,
नीलकण्ठ का प्यारा अन्ग !
गुडिया है दन्ग !!

करता कल-कल , नदिया का जल,
होती हल्चल , हरदम हरपल ,
उठती जल तरन्ग !
गुडिया है दन्ग !!

बडी ठाठ-बाठ , है सोन घाट ,
देवी के द्वार , सजता है हाट ,
मन मे उमन्ग !
गुडिया है दन्ग !!

सर्कस जादू , ठेलम ठेला ,
गुड्डे गुडियों से सजा है मेला ,
दुल्दुल घोडी और मलंग !
गुडिया है द्न्ग !!

गुलाबजामुन और मिठाई ,
पानीपुरी संग चाट खटाई ,
बर्फी पेठा और मलाई ,
खूब सजे लड्डू और लाई ,
लस्सी और भंग !
गुडिया है दंग !!

(Anuj Tiwari )

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