काम करने चला बचपन

खाने कि चाह पे खोया बचपन
रातो को राह पे सोया बचपन ,
सहम-सहम के रोया बचपन
फिर भी बोझा ढोया बचपन !

मुश्किलो मे पला बचपन
काम करने चला बचपन ,
धूप आन्च से जला बचपन
ठणड मे भी गला बचपन !

तूफानो मे हिला बचपन
महखाने मे मिला बचपन ,
जख्मो को भी सिला बचपन
कही , कलियो स भी खिला बचपन !

जिसने भी ये जना बचपन
पापी हाथो से हना बचपन ,
जुल्मो से भी सना बचपन
यहा कातिल बना बचपन !

यहा इक्कीसवी सदी क बचपन
चौराहे पे बिका बचपन ,
सम्बिधान ने लिखा बचपन
बोझ उथाते दिखा बचपन !

भारत का भाग्य विधाता बचपन
बेच रही है माता बचपन ,
खाने को तरसाता बचपन
ऊनसे भीख मगाता बचपन !

कलम की जगह तलवार थमाया बचपन
क्यू हथियार उथाया बचपन ,
मस्ती मे मतवाला बचपन
कहा गया दिलवाला बचपन !

“देश बेहाल चलाने वालो
तुम भी तो अन्जान नही !
बचपना न कर यू बचपन से
बिनु बचपन देश जवान नही ” !!

(- Anuj Tiwari -)

2 Comments

  1. bimladhillon 24/05/2015
    • Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari 24/05/2015

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