क्या मुश्किल

क्या मुश्किल क्या आसान रहा है
मौके पर किस्मत भी बेईमान रहा है
चाहत के पिछेे पागल होना पागलपन है
तो वहसीपन का परवान रहा है
मेरी जद में पागल सा एक तड़पता
वक्त-वक्त पर ईन्सान रहा है
घूँट-घूँट कर रोया हूँ कोनों में नित
खुशीयों का तो उनवान रहा है
हर एक ने हिम्मत को मेरे पश्त किया
फिर भी मुझको मुझपर अभिमान रहा है
दुनियां से तो खुदगर्जी ही मिली है
हां साथ मगर भगवान रहा है

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