माँ

माँ को खोकर हुआ माँ की ममता का एहसास |
ढूढ़ना चाहा था माँ को और प्रतिबिम्बों में,
पर कहीं नहीं मिला माँ का दुलारता हाथ |
वो लोरियाँ, वो प्यार भरी थपकियाँ,
वो उलाहने,वो डाँटना फिर पुचकारना |

बेटी को पाकर माँ और ज्यादा याद आती है,
उसकी एक-एक बातें बचपन को दोहराती है |
मेरी भीगी पलकों को देख उसका परेशान होना,
क्या कहूँ उससे एक माँ को है एक माँ की तलाश |

(सन्ध्या गोलछा)

4 Comments

  1. bimladhillon 24/05/2015
    • Sandhya Golchha 24/05/2015
  2. भारती शिवानी 24/05/2015
    • Sandhya Golchha 03/06/2015

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