एक नदी है दुनियाँ तो

एक नदी है दुनियांं तो
एक नाव है जिंंदगी,
चलता रह मांंझी पतवार लिए
जो कभी न रुके वो पाँव है जिंंदगी,
कभी खुशी कभी गम
कभी धूप कभी छाँव है जिंंदगी,
कभी खेत कभी खलियान
कभी शहर कभी गाँव है जिंंदगी,
ये सीधी भी है पेंंचीदा भी है
जुआ है एक दाव है जिंंदगी,
फकत धडकन सफर है व
मौत की पडाव है जिंंदगी,
वीरानो की उदासी है यह अौर
कभी पनघट की छाँंव है जिंंदगी,
फूलोंं की पंंखुडीयाँ भी है
कांंटोंं की घाव है जिंंदगी,
लहरेंं सांंसो की तरह हैंं
हरपल की बहाव है जिंंदगी,
पल पल को जी लो हँस हँस कर
हर दौर मेंं खुश रहने का नाम है जिंंदगी…………

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