बयाँ

जब आपने काबिल समझा ही नहींं
फिर आपसे मुहब्बत की दरकार क्यो करेंं
क्या करेंंगे कटींंली यादोंं को इकट्ठा करके
जिसमेंं सिर्फ चूभन ही चूभन शामिल हो
क्योंं लाएंं ख्याल वक्त की हर दहलीज पर
जो वक्त के साथ जिंंदगी बर्बाद करने पे अमादा हो
आपको सिर्फ मेरे रूह से खेलना गवारा है
तो खेल लिजिए जी भर कोइ कसर न छोडिएगा
वरना मौत तलक पछताएंंगे
क्योंंकि ऐसे खिलौने सबको नसीब नहींं हुआ करते
उठा लिजिए लुत्फ सब्र खत्म होने तलक
ये खुशनसीबी का मौका निकल न जाए
अपना क्या है परिंंदे हैंं
आज यहाँ कल वहाँ
दर दर की ठोकरेंं खाते हैंं
कदम कदम के लिए संंघर्ष करते हैंं
संंभाल लेंंगे दर्द के बेशुमार चूभन को
यह जमाना, दुनियाँ अौर इस समाज ने
हमेशा ही मेरे दिल को दुखाया है
सोचा था तुम मेरे दुख को हल्का करोगे
मगर तुम्हे भी उसी जमाने, उसी दुनियांं
अौर उस समाज से गहरा ताल्लुक है
जो हमेंं जाहिल, नाकाम व नालायक समझते हैंं
फिर क्या
कर लो आरजू मुकम्मल
मैंं खुद को खुशनसीब समझूंगा तुम्हारे इस काम आकर
तुम्हारी ख्वाहिश के लिए सब गवारा है
खैर कैसे भी सही
मगर काम तो आया……………

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