यादोंं का आवागमन

चैन को तंंग करने
एकाग्रता को भंंग करने
वो प्रतिदिन आती है
कुछ कहने
कुछ सुनने
और बहुत देर तक
पास रहती है
जब तक खाली रहता हूँ
मेरे अन्तर्मन से
खूब खेलती है
अनेकानेक प्रकार से
जब सहसा किसी
कार्य मेंं लग जाता हूँ
तो वह दोबारा मिलने का
वचन देकर चली जाती है
फिर जब खाली होता हूँ
तब सहसा आ जाती है
मुझसे खेलने के लिए
ये मिलने जुलने की श्रखला
प्रतिदिन का है
यादोंं का आवागमन का

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