।।चला गदेलव महुआ बीनै।।देसी कविता।।

।।चला गदेलव महुआ बीनै।।

पचपेड़वा की नरखोहिया में
बसवरिया के आगे।।
चुई चुई महुआ पैर परा बा
बड़े सबेरवा जागे ।।
अन्हियर्वा में जुग्गू काका
कब तक केका चीन्है ।।
चला गदेेलव महुआ बीनै ।।1।।

मौनी अउर सिकहुला लइके
सोवा जिन मुड़वारी
उठा चला अब कथरी फेका
जाय गिरै गोड़वारी
कुकू कुकू कै बोलै कोयल
बाटै अबही नीन्है ।।
चला गदेलव महुआ बीनै ।।2।।

गुग्गू काका के पेड़वा से
रोज चोरावै महुआ ।।
दाव लगाइके रोजै बईठे
मिलइ न एक मिठऊआ ।।
एक द्वि पावै टोय टाय के
अँगुरी पकड़ि के गीनै ।।
चला गदेलव महुआ बीनै ।। 3।।

आपन आपन गमछा लइल्या
अउर बोतलवम पानी ।।
उठा चला अब भोर होइगवा
करा न आना कानी ।।
लपसी बरिया बनई के बाटै
भले खाब द्वि तीनै ।।
चला गदेलव महुआ बीनै ।।4।।

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