फ़कीर

    1. रह सागर में क्यों तलाश जल करे,
      जो खुद गुलाब तमन्ना फूल क्या करे
      हम ठहरे तबियत से मौला-ऐ-फ़कीर
      लूटे कोई खजाने कुबेर हम परवाह क्यों करे…..!!

      ( डी. के. निवातियाँ )