पाक तुम्हारी बारी है .. ?

बहुत हुआ समझौता अब तक, ऐ पाक तुम्हारी बारी है ?
हमने तो तुझे भाई समझा , तू साला मक्कारी है !
बहुत लडाई की अब तक, कायरता और बेईमानी से
जन्ग कहा इसको तूने, ये जन्ग नही गद्दारी है !!

तेरी नापाक इरादो का , जब-जब उफान भर आयेगा !
जरा सा फूकार दिया हमने , तूफान खडा हो जायेगा !
पहचान बदल देगे° तेरी ,तेरे भौगोलिक मापो से
कश्मीर हथियाने का तेरा , अरमान धरा रहजायेगा !!
अब तक तुझे जो बक्ष दिया, ये अपनी खुद्दारी है !
हमने तो तुझे ……..!!

है गुरूर इतना अगर , पाक तुझे इस्लाम पर !
आकर भारत की सीमा मे , जन्ग का ऐलान कर !
फिर कराची को चाची बना , हम चरखा पकडायेगे°
काबुल को बुलबुल बना , ब्याह रचा घर लायेगे° !
हर बार जन्ग मे तो , तेरी सेना ही हारी है !
हमने तो तुज्हे ………!!

गर तूने आख दिखाई , हम आख नोचेगे !
तेरे तसब्बुर से तुज्हको धर दबोचेगे° !
फिर कितनी भी रहम की भीख मागे तू
भूल कर इन्सानियत , तेरे जख्मो को खरोचे°गे !!
बिना लात के बात न माने , तू ऐसा धुत्कारी है !
हमने तो तुज्हे ………!!

जहा चहक रहा था बचपन हरदम , आज वहा खामोशी है ! तोड दी सारी हदे°.., तू इन्सानियत का दोशी है !
क्या समझेगा तू नातो कि अहमियत को
ना तू भाई बन सका , ना तू नेक पडोसी है !!
हर एक वीर यहा का, हरदम आग्याकारी है !
हमने तो तुझे ……….!!

अपने घर मे घुसा हुआ, डाढी मे वो सैतानी !
काश्मीर की जन्ग छेद कर , करता हमशे खीचातानी !
हमारी अस्मत लूतने को यहा तैयात है
इन्तकाम क वक्त आगया , जागो प्यारे हिन्दुस्तानी !!
आज हमारे सीने मे , धधक रही चिन्गारी है !
हमने तो तूज्हे ……..!!