* सतसन्ग *

. बिनु सतसन्ग होय न ग्याना !!
सत्सन्ग से फैले ग्यान , आज यही मै माना !
देख सदगुरू को मै , माथा सदा नवाऊ° !
मालिक जीवन मे मै , सतसन्गत ही पाऊ !
सदगुरू ईश्वर से बद्कर , उनसे हमको मिलता ग्यान !
जीवन भर सदगुरू को पाऊ°, मेरे सदगुरू सदा महान !

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