Neta

दोस्तो आओ सुनाउ तुम्हे
नेताओ की दास्ता.
इमान के शिखर मे है
रिस्वत ही उनका रस्ता !

बचपन से ही ये
राज्नीती की गोद मे पले
खुद मे एकता न
देश को एक सूत मे बान्धने चले !

मिली है लाल बत्ती
वे दौरे मे मस्त है
अफसर भी उनकी
आवभत मे व्यस्त है
क्या खबर है
आम जन की ऊन्हे
कि जनता उनके
कारनामो से त्रस्त है !

डलबदलू आपस मे पन्गे
मजहब जाति धर्म के दन्गे
नेता नपादी तीन किस्म के
ज्हूथे फरेवी अओर लफन्गे !

दाव ताव पे जैसे उलज्हे शरावी
क्या खूब सज रहा आज मौशम चुनावी
इन नकाबी चहरो के ज्हूथे अफसाने
बहला रहे हमे दिखा के सपने गुलवी !

कोइ भीख मागते वोतो कि पूरे हाथ पसार
कोइ लत्थ ले बूतो पर करते है तकरार
कोइ गाव मुहल्ले घर-घर जा कर
पेती भर-भर दारू की बान्त रहे उपहar

हेन्गे रखते हम
जन हित मे आस्था !
ईमान के शिखर पे है
रिस्वत ही उनका रास्ता !!