तुम उनको हाथोंं का

तुम उनको हाथों का टेका दे दो
राहों में बूझ बूझ कर बलता है कोई
घने अंधेरे में चलता है कोई
एक दीया जलता है कोई
झोंको से लड़ता है कोई
दीप्ती पथ पर बढता है कोई
दृढ. प्रतिज्ञा ठानी होगी शायद
बाधाओं के मध्य से निकलता है कोई
उसने संकल्प लिया होगा कुछ
आँखों को लक्ष्य दिखा होगा कुछ
गिर गिर कर सँभल रहा अगर है तो
जीवन का विकल्प चुना होगा कुछ
जब उसने है विजय पथ पर बिगुल बजाई
कर न सकेगा रणभूमि में पराजय कोई
काम तुम्हे बस इतना सा करना है
उसके राहों को सुगम बनाता चल
मानव है मानव का साथ दिया कर
बूझे न धर्म का दीप बचाता चल
है सदा सत्य हुई विजय धरा पर
केशव शंखनाद करेंगे तो जीत क्या रोकेगा ।

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