मेरी माँ

मेरी माँ
ठंडी हवाओं को कैसे समझाऊं,
मेरी माँ मुझे गर्म रजाई में सुलाती है .
तपती धूप को कैसे समझाऊं ,
मेरी माँ मुझे अपने आँचल के साये में छिपाया करती है .
बरसते मेघ को कैसे समझाऊं ,
मेरी माँ मुझे जुकाम की दवाई खिलाती है.
बद्दुआ देने वालो को कैसे समझाऊं ,
मेरी माँ की दुआएं उन पर भारी पड़ती है .
नदी की गहराई उसे कैसे बताऊँ,
वो मेरी माँ से ज्यादा गहरी जो नहीं है .
हिमालय की मूर्खता उसे कैसे बताऊँ,
उसकी विशालता मेरी माँ के हिरदय से ज्यादा जो नहीं है.
मुझ पर बुरी नज़र रखने वालो को कैसे समझाऊं,
मेरी माँ मुझे काजल का टीका लगाया करती है.
मुझे तकिये की जरुरत नहीं ,
मेरे सिर के नीचे मेरी माँ का हाथ जो रहा करता है.
मुझे मंदिरो में जाने की जरुरत नहीं ,
मेरी भगवान मेरे घर में जो रहा करती है.

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  1. rakesh kumar rakesh kumar 16/05/2015

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