कितनी साँसें

कितनी सांसे थम जाती है जब पांव हमारी चलती है
लहू की दरिया में देखो नाव हमारी चलती है
ये अपनी धरती है आओ इसको साफ करे मिलकर
अपनी गंदी आदत से चहुॅओर बीमारी चलती है
वो इतना ज़ालीम है मेरे मौत की ख़्वाहिश रखता है
जिंदा हूॅ की खुदा के आगे कब होशियारी चलती है
हिंसा पे मूकदर्शक हो तो इतना सुन लो कानो से
तुम जैसो पे ही आगे छुरी और कटारी चलती है
क्या भिखारी क्या राजा क्या देवदूत आ जाये तो
अच्छे अच्छे झुक जाते है जब लाचारी चलती है
उपर दिखती झुठी बातें अन्दर का सच कड़वा है
प्रेम जहां फिरती रोजाना थी अब मक्कारी चलती है
तुम कहते हो तेरा सच है मैं कहता हूं मेरा सच
पर वो वाहेद है जिसके दम से सांस हमारी चलती है
वक्त है बदला तो न समझो की दास हुआ तेरा है
इसकी आंख मिचैली सब पर पारा पारी चलती है
खुद्दारी से जिने वालो का तब दिखता है असली चेहरा
जब गलियारों से होकर घूंघट में एक नारी चलती है
वह आता है आशाएं लेकर अमन का मेरे धरती पर
लेकिन पीछे उसके द्धारा हम पर गोली बारी चलती है

2 Comments

  1. vaibhavk dubey vaibhavk dubey 10/05/2015
    • sanjay kumar maurya sanjay kumar maurya 10/05/2015

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