सिर्फ एक “माँ” कर सकती है

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      सहकर कष्ट अपार जीवन
      दुसरो का जीवन बना सकती है
      करने को जीवन प्रदान किसी को
      खुद की जान दाँव पे लगा सकती है
      वो सिर्फ एक माँ ही कर सकती है !!

      रात रात भर
      हमको लोरी सुना सकती है
      जागकर रातो में
      हमको चैन की नींद सुला सकती है
      वो सिर्फ एक माँ ही कर सकती है !!

      बिन बताये संतान का
      चेहरे देखकर दर्द समझ सकती है
      जब कोई न आये पास
      रोते हुए को भी गले लगा सकती है
      वो सिर्फ एक माँ ही कर सकती है !!

      जिसे परहेज नही गंदगी से
      सबके लिए सारी गंदगी हाथो उठा सकती है
      उठकर मल-मूत्र बच्चे का
      हमको सबको स्वच्छ्ता का पाठ पढ़ा सकती है
      वो सिर्फ एक माँ ही कर सकती है !!

      बताकर अपना व्रत
      आखरी रोटी भी परिवार को खिला सकती है
      खुद रहकर गीले में
      बच्चो को सूखे आसन पे सुला सकती है
      वो सिर्फ एक माँ ही कर सकती है !!

      जिसे पढ़ न सके कोई
      तुम्हारे उस दर्द को वो खुद जी सकती है
      तुम्हारे घर से आने जाने पर
      आँखों से अोझल होने तक टकटकी लगा देखती है
      वो सिर्फ एक माँ ही कर सकती है !!

      हसतें हुए संग सब खेले
      रोते हुए को फिर खिलखिलाकर हँसा सकती है
      डांटकर बच्चो को गुस्से में
      फिर उन संग खुद भी फूटकर रो पड़ती है
      वो सिर्फ एक माँ ही कर सकती है !!

      जीवन भर बच्चो की ख़ुशी में
      अपनी खुशियो को तलाशती रहती है
      उनकी सफलता की लिए
      ताउम्र अपना योगदान निभा सकती है
      वो सिर्फ एक माँ ही कर सकती है !!

      जो बनकर झाँसी की रानी
      बच्चे संग जंग में छलांग लगा सकती है
      देकर आजाद, भगत को जन्म
      दुनिया को त्याग और फर्ज सीखा सकती है
      वो सिर्फ एक माँ ही कर सकती है !!

      जो बनकर सीता और द्रौपदी,
      इंसान का हरहाल में साथ निभा सकती है
      सुख के क्षण या दुःख के पल
      जीवन में कंधे से कन्धा मिलकर चल सकती है
      वो सिर्फ एक माँ ही कर सकती है !!

      बनकर इंदिरा गांधी
      दुनिया में अपना लोहा मनवा सकती है
      कोई लेकर रूप कल्पना चावला
      चाँद पर भारत का तिरंगा फहरा सकती है
      वो सिर्फ एक माँ ही कर सकती है !!

      जो भूलकर अपना पराया
      सबको ममता का पाठ पढ़ा सकती है
      जिस प्यार का लुफ्त उठाने
      राम, क्रष्ण,और विष्णु भी जमी पे आ सकते है
      वो सिर्फ एक माँ ही कर सकती है !!

      जितना भी करो गुणगान
      उसके लिए कम पड़ता है
      सबसे धनवान दुनिया में
      जिसको माँ का प्यार मिलता है

      कोटि कोटि बलिहारी जाऊं
      पल पल शीश उसको नवाऊ
      कुछ भी बस इतना करना प्रभु
      उस माँ को कभी न कष्ट पहुँचाऊँ

      ऋणी है हर कोई उसका
      जन्मो जन्मो में भी कोई चुका नहीं सकता है
      बना रहे उसका आशीर्वाद
      जिसके सहारे मेरी जीवन नैया पार लग सकती है

      वो सिर्फ एक माँ ही कर सकती है !!
      वो सिर्फ एक माँ ही कर सकती है !!
      वो सिर्फ एक माँ ही कर सकती है !!

      …………….( डी. के. निवातियाँ )

6 Comments

  1. vaibhavk dubey vaibhavk dubey 10/05/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 18/05/2015
  2. Manojkumar varma 19/10/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/01/2016
  3. kuldeep 14/01/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/01/2016

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