प्रेम का उजियाला

प्रेम का उजियाला फैलाने हेतु
हर अंधकार का दमन करेंगे
सितारों सी चमक चांद सी शीतलता से
जन-मन को रोशन करेंगे

द्वेष और भेदभाव की धूलि के
कण-कण मे प्रेम कुसुम की सुरभि बसायेंगे
आज की सारी पीडाओंं से ऊपर उठकर
उम्मीद है एक सुनहरा कल बनायेंगे

समुद्र-मंथन नहीं, आत्म मंथन है
पीढी की सबसे बडी जरुरत
जन-चेतना के साथ मन-चेतना के भी
प्रतिक्षण विकास का चुनना है पथ

है मुश्किलो भरा सफर भले जीवन का
मात्र प्रेम-आलोक है हल इन सब का
मानवता से ओतप्रोत जन-मन ही
प्रतीक है हर रब का

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