ईमानदारी

गंगा की लहरों में,
मस्जिद की सीढ़ियों पे,
आवाज़ दब जाती है,
मंदिर के घंटो में,
मस्जिद की आज़ान में,
खोजते है मुआल्वी पंडित,
भगवान अल्लाह के
मानने वालों में,
नेता खोजते अपने,
वोट देने वालों में,
ईमानदारी कहाँ बसी है ,
किसी बिल में छुपी है,
मिलती है, कुछ को,
पर पैसे की चमक,
में दबी पड़ी है,
निकल आए उस बिल से,
जब ये ईमानदारी,
तो खोल के जी लेगी
दुनिया सारी |

बी.शिवानी

4 Comments

  1. ashok 07/05/2015
    • भारती शिवानी 07/05/2015
  2. चिराग राजा 08/05/2015
    • भारती शिवानी 08/05/2015

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