नए तेवर नया अंदाज़ रखन

नए तेवर नया अंदाज़ रखना;
कहन सच्ची खरी आवाज़ रखना.

भले ही पंख हों छोटे तुम्हारे,
सदा ऊँची मगर परवाज़ रखना.

कभी भूखा कभी प्यासा रखेगी,
मगर इस ज़िन्दगी पर नाज़ रखना.

दुआएँ उनकी फलती फूलती है,
न पुरखों को नज़र- अंदाज़ रखना.

रहेगी ज़िन्दगी हर वक़्त जिंदा,
कहीं दिल में कोई मुमताज़ रखना.

बिना बोले जो मन की बात समझे,
कहीं ऐसा कोई हमराज रखना.

ग़ज़ल का हो अगर शौक़ीन बेटा,
तो उसका नाम ‘भारद्वाज’ रखना.

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