मेरी कहानी

आज में अपना सब कुछ गवाए बैठा हु ,
जाने कौन-कौन से दर्द सीने से लगाये बैठा हु ,
ठोकरे और रुस्वाइयां मिलने के बावजूद भी
कुछ यादो को दिल के आइनों में छुपाये बैठा हु ,

अश्कों की बरसात होती ही रहती है इन आँखों में,
फिर भी इनमे कुछ हसीं सपने सजाये बैठा हु ,
मिले कांटे ही हमें जिस राह पैर भी चले हम
में ज़माने की हर राह को आजमाए बैठा हु ,

निग़ाहें मिलायी थी हमने तुमसे वफा की चाह में ,
वफा के बदले सीने पर अपने जखमो को खाए बैठा हु ,
किसी कीमत पर नहीं झुका सिर मेरा कभी किसी के आगे
बस तेरे लिए ही इसे कब से झुकाये बैठा हु ,

कही लग न जाये काँटा कोई तेरे पाव में ,
इसलिए रास्तो पर तेरे कलिया फैलाये बैठा हु ,
सिर्फ तुम्हारा प्यार पाने के खातिर
में ज़माने के बाकि सारे सुखो को ठुकराये बैठा हु ,

कभी तो आकर देख ले एक बार ,
तेरी यादो में , मै खुद को लुटाए बैठा हु ,
बस तेरे प्यार का ही कर्ज बाकी है मुझपर
वरना ज़माने के हर कर्ज को चुकाए बैठा हु ,

खुद भी न जाने ‘कब उठ जाये अर्थी मेरी’ ,
बस तेरे इन्तेजार मै दिल को सजाये बैठा हु ,

Neerav

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  1. raj 05/05/2015

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