एक बार ही सही

मेरे गांव में ,
एक बार ही सही ,
नेता जरूर आते हैं .
मेरे गांव में ,
एक बार ही सही ,
अपनी टी आर पी बढ़ाने के लिए,
मीडिया वाले जरूर आते हैं .
बड़ा मजा आता है
कभी कटे हाथों वाले सैकड़ो झंडे ,
कभी कमल के फूल ,
रस्सियों के सहारे खिले होते हैं .
इनके बीच मीडिया वालो का क्या कहना ,
वह हमारे गांव की सम्पनत्ता को,
उसके नंगेपन का एहसास दिल जाते हैं .
नेता,
आश्वासनों की रोटियां खिला जाते हैं .
अखबार वाले ,
हमारे नौनिहालों के नंगे जिस्म पर,
कागज का कम्बल ओढ़ा जाते हैं.
एक बार ही सही
मेरे गांव में ,
ये हाई प्रोफाइल दिखने वाले लोग,
हमें और तख़लीफ़ पहुंचा जाते हैं.

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