सामने के घर में…

सामने के घर में जब देखी शमा,
अपने घर के वो उजाले याद आये।

भूलना चाहा किया जब दिल उन्हें,
और भी वो आज मुझको याद आये।

आसमाँ पे आज जब छायी घटा,
उनकी ज़ुल्फ़ों के वो साये याद आये।

आज जब देखा उन्हें बरसों के बाद,
उनके वो वादे पुराने याद आये।

— अमिताभ ‘आलेख’

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