महसूस करता हूँ हर जगह तेरी ही परछाइयाँ

महसूस करता हूँ हर जगह तेरी ही परछाइयाँ….

आज तो रूठा है मुझसे मेरा हमसफ़र ,
क्यूंकि मुझसे हो गई कुछ गुस्ताखियाँ |
कर दे माफ़ मुझे वो मेरे हमसफ़र ,
इस दिल से ना होगी कोई नादानियां ||

इस कदर प्यार है मुझे तुमसे वो मेरे हमसफ़र |
महसूस करता हूँ हर जगह तेरी ही परछाइयाँ ||

तेरे सिवा कोई समझे ना मुझे वो मेरे हमसफ़र,
तेरे बिन सुनी लगे ये चहकती हुई गलियां |
तू ही मेरा जूनून है और तू ही है मेरी आरज़ू ,
तेरे बिन खिले बागों में भी दिखे मुरझाई हुई कलियाँ ||

इस कदर प्यार है मुझे तुमसे वो मेरे हमसफ़र |
महसूस करता हूँ हर जगह तेरी ही परछाइयाँ ||

इतना भी नाराज़गी कि ना तू ज़िद्द पकड़ ,
और यूँ ना बढ़ा इस दिल से तू दूरियां |
ऐसे अनजान समझकर ना मुझसे मुँह फेर तू,
बस चेहरे पे एक मुस्कान लाकर मिटा दे ये उदासियाँ ||

इस कदर प्यार है मुझे तुमसे वो मेरे हमसफ़र |
महसूस करता हूँ हर जगह तेरी ही परछाइयाँ ||

वादा है मेरा तुझसे वो मेरे हमसफ़र,
नहीं होगी अब कोई भी मनमानियां |
अब मान भी जा वो मेरे हमसफ़र
और जल्दी से दे दे तू मुझे माफ़ियाँ||

इस कदर प्यार है मुझे तुमसे वो मेरे हमसफ़र |
महसूस करता हूँ हर जगह तेरी ही परछाइयाँ ||

(अंकिता आशू)

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