काश

तुम जो मेरी आँखों में एक बार झाँक लेते
शायद दिल की बात मैं तुम को बतला पाती
तुम जो आशाओं का समंदर एक बार नाप लेते
शब्दों की ज़िन्दगी से हस्ती ही मिट जाती

काश तुमने दो पंछिओं को संग उड़ते देखा होता
उनके निश्छल भाव से काश कुछ सीखा होता
तुम जो मेरी बातों को एक बार मान लेते
रंगों से मेरी दुनिया पहली बार मिल जाती

काश तुम ने दो फूलों को संग खिलते देखा होता
उनके कोमल भाव से काश कुछ सीखा होता
तुम जो मेरे हाथों को एक बार थाम लेते
साथ तेरा पाकर ये ज़िन्दगी ही खिल जाती

काश तुमने पतंगे को दीप संग देखा होता
उनके निस्वार्थ भाव से काश कुछ सीखा होता
तुम जो मेरी भावनाओ को एक बार जान लेते
दुनिया की सारी खुशियाँ तुझमे ही मिल जाती

तुम जो मेरी आँखों में एक बार झाँक लेते
शायद दिल की बात मैं तुम को बतला पाती

तुम जो मेरी आँखों में एक बार झाँक लेते
शायद दिल की बात मैं तुम को बतला पाती

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