जुदाई

क्या कहुं जुदाई का दर्द सहा नही जाता
तेरे बिना अब तो तनहा रहा नही जाता

ऐसा लगता है की कोई बदन में
सैंकड़ो सुइयां चुभोता है
आह भी न निकलने पाए
इतना पेहरा होता है

तेरे बिना अब तो जिंदा रहा नही जाता
क्या कहुं जुदाई का दर्द सहा नही जाता

तेरी यादो के सहारे
साँसे जो मेरी चल रही है
वो भी आने जाने को
आज कल इंकार कर रही है

तेरे दरस बिना अब हमसे रहा नही जाता
क्या कहुं जुदाई का दर्द सहा नही जाता

गर किसी से पूछती हूँ
वो राह जिसकी मंजिल तुम हो
लोग कहते हैं अब कोई रास्ता
वहां नही जाता

तेरे बिना अब तो तनहा रहा नही जाता
क्या कहुं जुदाई का दर्द सहा नही जाता

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