एक दास्तान इश्क़ का

एक दास्तान इश्क़ का …..

उसकी यादें…..
याद आती है लहराती है कलकलाती है …
मानो जैसे दरिया का पानी …..
सूनापन हो अकेलापन हो वीरानगी हो
मानो जैसे ज़िन्दगी में नहीं है कोई रवानी …
दिल मजबूर है और टूटा हुआ है ….
मानो जैसे अधूरी रह गयी है मेरी प्रेम कहानी ….

उसकी बातें …..
आज भी दिल में है ….
लेकिन दिल में ही है नहीं ला पाता उसको जुबानी …
सिसकता हूँ रात में ……
और आँखों से भी बरसता है पानी ….
कैसे वो भूल गई मुझे …
शायद वो भी थी कभी मेरी दीवानी ….

बीते लम्हें…..
एक हवा का झोका था ….
और वो रात भी थी तूफानी …
मिले थे जब हम एक दूसरे से ….
ऐसा लगा था कोई खास है ये अंजानी …
उसका वो हंसना और मुस्कुराना …
और दीवानी बनाई थी मुझे उसकी आँखें नूरानी ….
पल भर के लिए लगा था मुझे ……
मैं उसका राजा और वो है मेरी रानी….

वर्तमानी लम्हा …..
सब कुछ ख़त्म हो गया ….
जैसे शुरू ही नहीं हुई थी कोई कहानी….
आज वो सब भूल कर घूमती है ऐसे …
जैसे वो है एक आज़ाद पंछी सुहानी….
और मेरा क्या मैं आज भी बैठा हूँ इंतज़ार में …..
जैसे फिर से शुरू होगी मेरी और उसकी प्रेम-कहानी …..

(अंकिता आशू)

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  1. Hardeep Singh 28/04/2015

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