संभल जाओं ऐ दुनियाँ वालों – डी. के. निवातिया

संभल जाओं ऐ दुनियाँ वालों
वसुंधरा पे करो घातक प्रहार नही !
रब करता आगाह हर पल
प्रकृति पर करो घोर अत्यचार नही !!

लगा बारूद, पहाड़-पर्वत उड़ाए
स्थल रमणीय सघन रहा नही !
खोद रहा खुद इंसान कब्र अपनी
जैसे जीवन की अब परवाह नही !!

लुप्त हुए अब झील और झरने
वन्यजीवो को मिला मुकाम नही !
मिटा रहा खुद जीवन के अवयव
धरा पर बचा जीव का आधार नहीं !!

नष्ट किये हमने हरे भरे वृक्ष, लताएं
दिखे कहीं हरयाली का अब नाम नही !
लहलाते थे कभी वृक्ष हर आँगन में
बचा शेष उन गलियारों का श्रृंगार नही !

कहा गए हंस और कोयल, गोरैया
गौं माता का घरो में रहा स्थान नही !
जहाँ बहती थी कभी दूध की नदियाँ
कुँए, नलकूपों में जल का नाम नही !!

तबाह हो रहा सब कुछ निष्-दिन
आनंद के आलावा कुछ याद नही
नित नए साधन की खोज में
पर्यावरण का किसी को ध्यान नही !!

विलासिता से शिथिलता खरीदीं
करता ईश पर कोई विश्वास नही !
भूल गए पाठ सब रामायण, गीता के,
कुरान,बाइबिल किसी को याद नही !!

त्याग रहे नित संस्कार अपने
बुजुर्गो को मिलता सम्मान नही !
देवों की इस पावन धरती पर
बचा धर्म -कर्म का अब नाम नही !!

संभल जाओ ऐ दुनियाँ वालो
वसुंधरा पे करो घातक प्रहार नही !
रब करता आगाह हर-पल
प्रकृति पर करो घोर अत्यचार नही !!
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डी. के. निवातिया__________@

18 Comments

  1. vaibhavk dubey वैभव दुबे 25/04/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/04/2015
  2. Aaakashnaya 07/05/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/05/2015
  3. ahuja 27/05/2015
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/05/2018
  4. ahuja 27/05/2015
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 26/09/2018
  5. garibdas 28/05/2015
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 26/09/2018
  6. chulbuli 31/05/2015
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/05/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/09/2018
  7. Noji vaidyan 26/09/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 26/09/2018
      • Noji vaidyan 26/09/2018
        • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/09/2018

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