आखिर क्या थी कमी बीते उस हसीन कल में

आखिर क्या थी कमी बीते उस हसीन कल में

क्यों दिए तूने प्यार में ऐसे सितम मुझे ,
क्या तुझे मेरे प्यार की परवाह नहीं थी ए दिले -नादान|
लूटा दिया मैंने अपना सब कुछ तेरे ऊपर ,
फिर भी आज बन रही है तू मुझसे अनजान ||

क्यों दिया तूने मेरे प्यार को ठुकरा एक पल में |
आखिर क्या थी कमी बीते उस हसीन कल में ||

हमेशा तेरी मर्ज़ी को मैंने अपना भी मर्ज़ी बनाया ,
आखिर कमी कहा थी मुझे समझ नहीं आया |
क्या थी मेरी खता इतना ही बता दे मुझे ,
फिर मुड़कर कभी दुबारा नहीं देखेगा ये नादान मुसाफिर तुझे |

क्यों दिया तूने मेरे प्यार को ठुकरा एक पल में |
आखिर क्या थी कमी बीते उस हसीन कल में ||

तेरे लिए ही मैंने छोड़ा ये सारा ज़माना ,
आखिर किया क्या था गुनाह मैंने यही नहीं जाना |
जाना ही था दूर मुझसे तो एक बार बोल के तो देखती ,
हँसते-हँसते दे देता मैं ही तेरा हाथ जिसे तू अब है चाहती |

क्यों दिया तूने मेरे प्यार को ठुकरा एक पल में |
आखिर क्या थी कमी बीते उस हसीन कल में ||

क्यूँ की तूने बेवफाई क्यों दिलाया मुझे शिकवा का एहसास ,
अब इस दर्द का नहीं है कोई दवा मेरे पास |
तोडा भरोसा और तोड़ दिया तूने मेरा विश्वास ,
ज़िन्दगी में दुबारा कोई आ नहीं पायेगा मेरे इस टूटे दिल के पास |

क्यों दिया तूने मेरे प्यार को ठुकरा एक पल में |
आखिर क्या थी कमी बीते उस हसीन कल में ||

(अंकिता आशू)

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