तो कभी हम ज़िन्दगी को आजमाते रहे

तो कभी हम ज़िन्दगी को आजमाते रहे…

कभी ज़िन्दगी हमे आजमाती रही ,
तो कभी हम ज़िन्दगी को आजमाते रहे…
कभी दर्द की तन्हाई में डूबना तो कभी उतरना,
तो कभी ख़ुशी और गम का गीत गुनगुनाते रहे …..
कभी आई बरसात तो कभी आया सावन ,
फिर भी हम जेठ की धूप में तपते रहे…..
कभी ज़िन्दगी हमे आजमाती रही ,
तो कभी हम ज़िन्दगी को आजमाते रहे…

हम “हम ही हैं ” या “हम हम नहीं”,
हर समय इसी सवाल में उलझे रहे |
राहों में पत्थर और रुकावटें बहुत थी ,
फिर भी उसी राह से गुज़रते रहे……
कभी ज़िन्दगी हमे आजमाती रही ,
तो कभी हम ज़िन्दगी को आजमाते रहे…

ज़िन्दगी में परेशानियां और उलझने बहुत थी ,
फिर भी ज़िन्दगी में सुकुन ढूंढते रहे |
ना जाने किस समय आँखे लगी मेरी ,
और फिर सपनो में भी हम भटकते रहे ||
ज़िन्दगी ने बहुत मौका दिया रोने का,
पर हम उन मौकों को भूल के मुस्कुराते रहे ||

कभी ज़िन्दगी हमे आजमाती रही ,
तो कभी हम ज़िन्दगी को आजमाते रहे….

(अंकिता आशू)

One Response

  1. vaibhavk dubey vaibhavk dubey 25/04/2015

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