अन्नदाता के बारे में किसने सोचा ?

अन्नदाता के घर का आँगन आज भी बंजर और सुना है |
अन्नदाता आज भी बेजार है और आज भी बेखबर है |
अन्नदाता का अत्तीत, आज और कल भी बेजार है|
विद्यानो के सम्मलेन में विद्यान भाषण देते है |
लम्बी –लम्बी बाते और बहस करते है |
वादे करके अपनी बात से कल मुकरते है |
अन्नदाता की भूमि आज भी बंजर और उसकी पूजी नीलम है |
अन्नदाता के घर का आँगन आज भी बंजर और सुना है |
अन्नदाता आज भी बेजार है और आज भी बेखबर है |