एक रोज़ तुमको देखा…

एक रोज़ तुमको देखा, तमन्ना है रोज़ देखूं।
अब तक थे अजनबी तुम, अब अपना कह के देखूँ।।

जब शाम ढल रही हो, या हो रात तनहा तनहा।
जी चाहता है उस पल, तुम्हे याद कर के देखूँ।।

अब तक तो मैंने तुझको, बस ख्वाब में ही देखा।
अब सोचता हूँ तुझसे, मुलाक़ात करके देखूँ।।

अब तक तो जब मिले थे, खामोश थे यूं हम तुम।
अब वक़्त कह रहा है, कुछ बात करके देखूँ।।

— अमिताभ ‘आलेख’

2 Comments

  1. virendra pandey virendra pandey 24/04/2015
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 24/04/2015

Leave a Reply