शेरो शायरी

      किस से करू शिकायत के आवाज तुम तक अब जाती नही !
      बेवजह लगती है जिंदगी जब ये काम किसी के आती नहीं !!

      काश कुछ ऐसा हो जाए की हम भूल जाए उनको !
      चाहकर भी याद उनकी इस जहन से जाती नही !!

      तमाम जिस्म महक उठा एक बार जो गुजरे वो करीब से !
      जाने कौन इत्र से नहाये थे जिसकी खुशबु है के जाती नही !!

      कुछ ऐसे करगए बसेरा मन मंदिर में जैसे कोई सन्यासी !
      एक बार जो जोग लिया फिर लौट के घर वापस जाते नही !!

      मंदिर में न मस्जिद में तुम रहते हो भगवन मेरे दिल में !
      अब तेरे नाम के बिन मेरी एक भी सांस आती जाती नही !!

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