वक्त से हमारी रजामंदी

वक्त की अजब और गजब रजामंदी है |
हम वक्त से कहते है कि तू रुक जा |
पर वक्त अपनी चाल से चलता है |
वक्त हमारी रजामंदी से नहीं रुकता है |
हम उनका जिंदगी भर इन्तजार करने के लिए भी रजामंद है |
उनकी यादे भी बार –बार हमको रजामंद होने के लिए मजबूर करती है |
वक्त की अजब और गजब रजामंदी है |
हमको वक्त से कोई शिकायत नहीं है |
आज वक्त से कहते है कि तू रुक जा |
पर वक्त अपनी चाल से चलता है |

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