लाइलाज

कुछ नहीं हो सकता अब उसका
शहर के बड़े डॉक्टर ने अब जवाब दे दिया है
लाइलाज हो चुकी बीमारी उसकी
जब से होकर आया गॉव से
मिटटी की गंध
उसके भीतर तक समा गई है

नथुनों से प्रविष्ट गंध
श्वास नली, फेफड़ों, धमनियों से होती हुई
कोशिकाओं में पैठ गई है

अक्सर वह नींद में बड़बड़ाता है
नीम‌….
पोखर….
गाय…..
गौरैया….
और न जाने कैसे-कैसे शब्द
घोंसला… घोंसला… चिल्लाते हुए
अचानक दौड़ने लगता है बदहवास
कांक्रीट के जंगल में…..

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